रोडेन्ट मूषक (चूहे)

अंग्रेजी का ‘रोडेन्‍ट’ शब्‍द ग्रीक शब्‍द ‘रोडर’ से लिया गया है जिसका अर्थ कुतरना है अर्थात वे जीव जिन्‍हें कुतरने की आदत होती है। रोडेन्‍ट में अधिकांशत: चूहे, गिलहरी, सेही आदि होते हैं। रोडेन्‍ट का फाइलम- कशेरूकी, वर्ग स्‍तनपायी, ऑर्डररोडेन्शिया और इनमें से चूहें मूरीडेयी परिवार से हाते हैं। इसके रोडेन्शिया ऑर्डर में सबसे छोटी चूहिया से लेकर सबसे बड़े सेही तक के आकार के अनेक में जीव शामिल होते हैं। रोडेन्‍ट को अन्‍य स्‍तनपायी में इनके दातों की रचना से अलग से आसानी से पहचाना जा सकता है।

 

 रोडेन्‍ट को आमतौर पर चूहा कहा जाता है जो मानव जाति का प्रमुख शत्रु है। यह भोजन और चारे का शत्रु है। चूहों में अनेक प्रजाति समूह शामिल होते हैं जो भोजन मानव स्‍वास्‍थ्य और रोजमर्रा के उपयोग की वस्‍तुओं में उनकी नाशक भूमिका के कारण आर्थिक रूप से अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं।

 

चूहों की आदतें, प्रकृति, व्‍यवहार और पारिस्‍थितिकी में अनुकूलन उनके व्‍यापक फैलाव और अत्‍यधिक आबादी के मुख्‍य कारण हैं। साहित्‍य बताता है कि कृषि की शुरूआत के साथ ही लगभग 5000 वर्ष पहले रोडेन्‍ट के खिलाफ लड़ाई शुरू हुई थी। 1975 से हमारे देश में इनकी पहचान (नेशनल पेस्ट) और मानव जाति के पहले नंबर के शत्रु के रूप में की गई है।

 

 चूहे खेतों तथा विभिन्‍न वस्‍तुओं के भंडारण के दौरान अत्‍यंत हानि पहुँचाते हैं। खेत में सब्‍जी, तिलहन, अनाज आदि जैसी कई फसलें शुरूआती अवस्‍था में चूहों द्वारा खा ली जाती है और संदूषित की जाती है। वे मानव और अन्‍य पशुओं के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य रोग अर्थात प्‍लेग, लैप्‍टोस्‍पाइरोसिस संक्रमित करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

भारत में चूहों की कुछ प्रमुख प्रजातियां:

चूहों को उनके आश्रय के आधार पर मोटे तौर पर तीन समूहों में बांटा जा सकता है:

 

घरों में पाये जाने वाले चूहे खेतों में पाये जाने वाले चूहे खेतों और घरों दोनों में पाये जाने वाले चूहे
Rattus rattus(House rat) Bandicota bengalensis (Lesser bandicoot) Rattus norvegicus(Norway rat)
Mus musculus (House mouse) Tetera indica (Indian gerbil) Rattus rattus rufescens (Indian Black rat)
  Nesokia indica (Short tail mole rat) Bandicota indica (Large bandicoots)
  Rattus meltada (Soft fur field rat)  
  Mus booduga (Field mouse)  
  Meriones hurrianae(Indian desert gerbil)  
  Golunda ellioti(Indian Bush rat)  

चूहे बहुत चालाक और शंकालु स्‍वभाव के जंतु होते हैं और प्रतिक्रियस्वरूप नई वस्‍तु से दूर रहते हैं जिसे नियोफोबिया कहते हैं। चूहों को जल की रोजमर्रा जरुरत होती है लेकिन चूहा कई दिनों तक जल के बिना भी जीवित रह सकता है। चूहा भोजन के बिना एक सप्‍ताह तक जीवित रह सकता है लेकिन जल के बिना लगातार तीन दिन से अधिक जीवित नहीं रह सकता है। वे चारे को देखकर केवल शर्माते हैं बल्‍कि उनके परिवार का एक भी सदस्‍य मरता है तो वे चिंतित हो जाते हैं।

 

उनके भोजन का समय आमतौर पर रात में रहता है। चूहे न केवल अनाज खाते हैं बल्‍कि वे अपने मल, मूत्र, बाल, और कभी-कभी अपने मृत शरीर से जितना खाते हैं उसके 20 गुणे अधिक को संदूषित करते है। औसतन प्रत्‍येक चूहा रोजाना 25 से 150 मिंगन करते हैं, 15 से 25 मिलिलीटर मूत्र त्‍यागते हैं और हजारों बाल शरीर से छोड़ते हैं। चूहों द्वारा बोरियां काट दी जाती है जिससे खाद्यान्‍न बर्बाद होते है। चूहे अनाज को आंशिक रूप से तथा इसके भ्रूण को खाने के लिए जाने जाते हैं जिससे यह बीज के लायक नहीं रहता और बर्बाद हो जाता है। चूहे भवनों की नींव तथा दैनिक उपयोग की अन्‍य वस्‍तुओं को क्षति पहुँचाते हैं। इसके अलावा, वे मानव में 35 प्रकार के संक्रामक रोग फैलाते हैं।

 

भारत में चूहों द्वारा की जाने वाली खाद्यान्‍नों की अनुमानित हानि 2.4 मिलियन टन से 26 मिलियन टन प्रतिवर्ष की के मध्य है। एक अनुमान के अनुसार 6 चूहे रोजाना एक आदमी का भोजन खा जाते है और भारत में लगभग 2400 मिलियन चूहे है। पान्से कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 2.5 प्रतिशत हानियां भंडारण में रोडेन्‍ट के कारण होती है। रोडेन्‍ट औसतन रोजाना अपने शरीर के वजन का लगभग 8 से 15 प्रतिशत खाद्यान्‍न खा जाता है।