नमी

यदि अनाज में नमी तत्‍व अधिक होते हैं तो सर्वोत्‍तम वातन उपकरण और निगरानी प्रबंधन भी अनाज को खराब होने से नहीं बचा सकेगा। सभी भंडारित उत्‍पाद कीट जंतु बाधा, घुन सहित सूक्ष्‍म जीवाणुओं को जीवित रहने और बढ़ने के लिए नमी अपेक्षित होती है। यदि भंडारण में रखे जा रहे उत्‍पाद में नमी तत्‍व कम होते हैं तो कीट और सूक्ष्‍म जीवाणु पैदा नहीं हो सकेंगे बशर्ते कि भंडारण में भी नमी की मात्रा कम रखी जाए।

 

इस नमी तत्‍व को सुरक्षित नमी तत्‍व कहा जाता है। अत्‍यधिक आद्रता के कारण फफूँद और विशेष रूप से एस्‍पर्गिलस प्रजाति की बहुगुणकता बढ़ जाती है जो खतरनाक विष (एफलाटॉक्‍सिन) बनाता है और जो अनाज को मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्‍त बनाता है। नम उष्‍मन ‘ अधिक नमी की मौजूदगी में फफूँद की गतिविधि के कारण अनाज का तापक्रम बढ़ता है। शुष्‍क उष्‍मन’ कीटों की गतिविधियों और उनके श्‍वसन के कारण तापक्रम में वृद्धि होती है। संतुलित नमी तत्‍व ‘यह वह बिन्‍दु होता है जिस पर अनाज आस-पास की हवा से नमी न लेता है और न उसमें छोड़ता है। 27 डिग्री सेल्‍सियस से नीचे भंडारित अनाज और दलहन के लिए सुरक्षित नमी तत्‍व है।

 

उत्पाद सुरक्षित नमी सामग्री (%) अनाज: मक्का आटा 11.5 मक्का खोलीदार 13.5 बाजरा 16.0 चावल (मिल्ड) 13.0 चावल 15.0 चारा 13.5 गेहूँ 13.5 गेहूं का आटा 12.0 दलहन: बाकला, लोबिया 15.0 मसूर, मटर 14.0

 

खाद्यान्‍न भंडारण में नमी तत्‍व

 

उपज में नमी होती है जो दाने में दो मुख्‍य रूपों में होती है जो जल का संघटन और सोखा गया जल अथवा मुक्‍त जल होता है। तथापि, अनाज उत्‍पाद में मौजूद मुक्‍त जल की मात्रा महत्‍वपूर्ण घटक होती है जो खाद्यान्‍नों के सुरक्षित भंडारण में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसे भारतीय मानक द्वारा 130 से 133 डिग्री सेल्‍सियस पर 2 घंटे तक गरम करके भार में आई कमी के रूप में परिभाषित किया जाता है। दूसरी परिभाषा में इसे जल की उस मात्रा के रूप में परिभाषित किया जाता है जो दाने की रासायनिक अवसंरचना में परिवर्तन लाए बिना हटाई जा सकाती है।

 

शुष्‍क खाद्यान्‍नों में जल की मात्रा लगभग 0.05 किलोग्राम/किलोग्राम से 0.30 किलोग्राम/किलोग्राम के बीच भिन्‍न-भिन्‍न होती है। भंडारित उत्‍पादों में नमी तत्‍व द्वारा जैविक घटकों की गतिविधियां भी नियंत्रित होती हैं। जिस दर पर रासायनिक और भौतिक परिवर्तन होते हैं वे अनाज में अधिक नमी तत्‍व के साथ बहुत तेजी से बढ़ते हैं। अधिक महत्‍वपूर्ण घटक यह है कि कम नमी तत्‍व होने से अनाज और उनके उत्‍पादों का लंबी अवधि के लिए भंडारण किया जा सकता है।